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आपके तो पापा ही नहीं हैं... (लघु-कथा)

Posted On: 22 Apr, 2014 Others में

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पम्मी ने छोटे से बच्चे को छेड़ते हुए कहा- तुझे कैसे पता है कि ये ऐसा होता है ? छोटा बच्चा- मुझे तो मेरे पापा सिखाते हैं, इसलिए मुझे सब पता चल जाता है. आपके तो पापा ही नहीं हैं, तो आपको कैसे पता चलेगा…. एक छोटे से बच्चे के मुंह से ये सुनकर पम्मी के साथ ही आस-पास बैठे सभी लोगों का चेहरा भी मुरझा जाता है. और स्वयं उस छोटे-से बच्चे का पिता भी सोच में पड़ जाता है. क्योंकि उसके भी पिता जीवित नहीं थे. बच्चे तो मन के सच्चे होते हैं. जो अन्दर है, वही बाहर भी. जो सिखा दो, उसी को सीख जाते हैं… छोटे बच्चे की बातों को सुन एक ओर जहाँ कुछ लोग हँसे, वहीँ दूसरी ओर पम्मी अपने पिता के जीवित न होने के गम में न हंस पाता है और न ही रो पाता है… वो तो बस सोचता रहता है… आपके तो पापा ही नहीं हैं…

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