Proud To Be An Indian

Truth, Truth & Truth ... (अब तक की ज़िन्दगी को जी कर यही समझ आया है कि ज़िन्दगी सच में एक सफ़र ही है...)

149 Posts

1379 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 580 postid : 2232

छेड़छाड़ का शिकार लड़कियां ही क्यों होती हैं...???

Posted On: 12 Dec, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हमारे देश की बात करें तो यहाँ यह एक खास लेकिन आम समस्या हैं. छेड़छाड़ पर हम तभी कुछ ठोस करते दीखते हैं, जब कुछ बहुत ही गंभीर हो चुका होता हैं. अन्यथा इस छेड़छाड़ को एक सामान्य सी बात या रोज-रोज सुनने में आने वाला मामला समझकर इग्नोर कर दिया जाता हैं. छेड़छाड़ की शिकार लड़कियां या महिलाये ही होती हैं. हाँ, अब अपवाद स्वरुप पुरुष भी छेड़छाड़ के शिकार होने लगे हों, तो कुछ अतिश्योक्ति न होगी और इसीलिए थोड़ी संभावना इसके लिए भी रखनी ही होगी. लेकिन हम बात करते हैं लड़कियां या महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ की. छेड़छाड़ आखिर होती क्यों हैं ? विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण तो प्राकृतिक हैं. फिर ये दोनों में पाया जाता है. लेकिन छेड़छाड़ होती है केवल लड़कियां या महिलाओं के साथ, क्यों ? कुछ अपवादों को छोड़ कर यदि देखा जाये तो पुरुष महिलाओं से शारीरिक रूप से ज्यादा ताकतवर होता हैं (जो कि वास्तव में है नहीं) और इसीलिए वह ये सोचता है कि वह लड़कियां या महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करके बखूबी बच भी सकता है. फिर यदि विरोध होता है, तो वह लड़कियां या महिलाओं को काबू कर सकता है. इसके अतिरिक्त हमारा सामाजिक स्तर भी इसमें भूमिका निभाता है. यदि कोई लड़की या महिला हमारे ही गली, मोहल्ले और शहर से ताल्लुक रखती है, तो उसे छेड़ते समय उसके सामाजिक स्तर का ख्याल पुरुष अवश्य रखता है. क्योंकि परिणाम इस बात पर एक हद तक निर्भर हो जाता है. यदि कोई पुरुष कुछ सुन्दर लड़कियों या महिलाओं का समूह देख बहुत ज्यादा आकर्षित भी होता है, तो यह तय है कि वह उन्हें छेड़ने कि कतई गलती नहीं करेगा. लेकिन यदि उसी पुरुष के पास उनसे ज्यादा बड़ा समूह होगा, तो वह दुगनी कोशिश करेगा. और इस बार वह सामाजिक स्तर को भी नजरंदाज करेगा. छेड़छाड़ को किसी भी रूप में सही नहीं कहा जा सकता है. छेड़छाड़ आज इसलिए और गंभीर समस्या हो गयी है, क्योंकि यह हिंसक ज्यादा होती जा रही है. वहीँ दूसरी ओर लड़कियां या महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के लिए महिलाओं के कपड़ों पर भी आये दिन सवाल उठाए जाते हैं. वस्त्र किसी के भी लिए निजी सवाल होता है. लेकिन हाँ, जब हम सामाजिक प्राणी के रूप में बात करते हैं तो हमें थोडा ध्यान अवश्य रखना होगा. फैशन के नाम पर शरीर दिखाना ठीक कैसे हो सकता है? लेकिन सुन्दर दिखने और आराम प्राप्ति के लिए हम अपनी पसंद के कपडे पहन ही सकते हैं. हममे से अधिकांश लोग ये महसूस करते हैं की जब वे अपने घर की महिलाओं के साथ होते हैं तब बुरी नजर डालने वाले बहुत से दुष्ट दूर से बुरी नजर तो डालते हैं, लेकिन पास आकर उन्हें छेड़ने का दुस्साहस नहीं करते. यही कारन हैं ही हममे में बहुत से लोग अपने घर की लड़कियों और महिलाओं को अकेले नहीं भेजना चाहते. लेकिन समय और परिस्थितियां हमारे वश में नहीं होती हैं. नैतिकता एक बड़ा रोल अदा करता है. कुछ वर्ष पूर्व तक वर्तमान सी परिस्थितियां नहीं थी. छेड़छाड़ तब ऐसे भयावह रूप में नहीं था. जिस तेजी से समाज से नैतिकता का ह्रास हुआ है, वह अधिक जिम्मेदार माना जाना चाहिए. हम देखते हैं की हम अपने बनाये कानूनों से जल्द व् ठीक से बाज नहीं आते लेकिन प्राकृतिक कानून हमें ऐसा नहीं करने देते हैं. यानि जब प्रकृति हम पर अपना शिकंजा कसती है, तो हमारे पास कोई विकल्प नहीं होता है. देखने और सुनने में आया है की जो महिलाएं या लड़कियां छेड़छाड़ होने पर ऑन द स्पॉट छेड़छाड़ करने वाले पुरुष को शारीरिक रूप से सबक सिखा देती हैं जैसे- थप्पड़, जूते या चप्पल से या फिर लोगों को साथ लेकर उसकी धुनाई करने जैसे काम कर देती हैं, वह न सिर्फ एक मिसाल बनती हैं बल्कि भविष्य में अपने प्रति होने वाली छेड़छाड़ से बच जाती हैं. लेकिन जो चुप रहती हैं या अवसर प्रदान करती हैं, वे भविष्य में गंभीर परिणाम को भी बुलावा देती हैं. महिलाएं किसी भी रूप में पुरुषों से कमतर नहीं होती हैं. बस इस बात को उन्हें सरे राह, सरे बाज़ार प्रूव करने की जरुरत हैं.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

16 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
January 22, 2013

विचारणीय लेख. साहस रखना लड़कियों के लिए भी आवश्यक है सही कहा आपने तुफैल जी पहले ये लेख छूट गया था.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    February 4, 2013

    आदरणीय निशा जी सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

seemakanwal के द्वारा
December 17, 2012

शायद ये लडकों का टाइम -पास और मनोरंजन का एक साधन भी है . विचार पूर्ण लेख ,धन्यवाद

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय सीमा जी सादर अभिवादन, शायद कुछ महिलाओं और लड़किओं द्वारा छेड़छाड़ की इस समस्या को इसी (टाइम -पास और मनोरंजन का एक साधन) हल्केपन से लेने के कारण यह समस्या परवान चढ़ रही है. अभी कल की दिल्ली की घटना रोंगटे खड़े करने वाली हैं. खबर है की दिल्ली में ही २०१२ में ६५० से ऊपर रेप के केस सामने आये हैं. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

ashishgonda के द्वारा
December 15, 2012

आदरणीय! बहुत ही विचारणीय और अनुकरणीय आलेख पर “आभार” स्वीकार करें… साथ ही मेरी “आभार” कविता पढ़ने का समय निकाले— http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/12/12/%E0%A4%86%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0/

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय आशीष जी सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 14, 2012

मंथन योग्य लेख है आपका. बधाई.सादर

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

yogi sarswat के द्वारा
December 14, 2012

लेकिन सुन्दर दिखने और आराम प्राप्ति के लिए हम अपनी पसंद के कपडे पहन ही सकते हैं. हममे से अधिकांश लोग ये महसूस करते हैं की जब वे अपने घर की महिलाओं के साथ होते हैं तब बुरी नजर डालने वाले बहुत से दुष्ट दूर से बुरी नजर तो डालते हैं, लेकिन पास आकर उन्हें छेड़ने का दुस्साहस नहीं करते. यही कारन हैं ही हममे में बहुत से लोग अपने घर की लड़कियों और महिलाओं को अकेले नहीं भेजना चाहते. लेकिन समय और परिस्थितियां हमारे वश में नहीं होती हैं. नैतिकता एक बड़ा रोल अदा करता है. कुछ वर्ष पूर्व तक वर्तमान सी परिस्थितियां नहीं थी. छेड़छाड़ तब ऐसे भयावह रूप में नहीं था. जिस तेजी से समाज से नैतिकता का ह्रास हुआ है, वह अधिक जिम्मेदार माना जाना चाहिए. सहमत हूँ आपसे ! अच्छा सामाजिक लेखन !

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय योगी जी सादर अभिवादन, पोस्ट पर आपने सहमती जताई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

alkargupta1 के द्वारा
December 13, 2012

सुन्दर विचारणीय आलेख तुफैल जी ….बधाई

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय अलका जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

santosh kumar के द्वारा
December 12, 2012

आदरणीय तुफैल जी ,.सादर अभिवादन बहुत ही सुन्दर प्रेरणास्पद लेखन के लिए हार्दिक अभिनन्दन ,…प्रामाणिक बात है कि जूतों के भूत बातों से नहीं मानते हैं ,…बहुत गंभीर सुंदरता से कारण परिस्थिति और निदान दिखाते लेख के लिए बहुत आभार ,…सादर

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय संतोष जी सादर अभिवादन, उदहारण तो हमें पेश करने ही पड़ेंगे. पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

mayankkumar के द्वारा
December 12, 2012

आपका प्रश्न जायज़ है …….. ! सवाल-जवाब पूरा मानसिकता पर निर्भर है ……… लेख पढ़ कृता हुआ …….. सधन्यवाद

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय मयंक जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com


topic of the week



latest from jagran