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नकद पुरस्कार वाला लिफाफा !!... (लघु-कथा)

Posted On: 20 Nov, 2012 Others में

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कवितायेँ लिखने का उसे बहुत शौक था. पहले तो अपनी डायरी में लिखी, फिर अपनी सहेलियों को भेजे पत्रों में भी अवसर के अनुरूप लिख दिया करती थी. धीरे-२ उसका ये शौक एक पैसन में तब्दील होता चला गया. कुछ पत्रिकाओं में भी उसने लिखना शुरू किया. अच्छी रचना होने पर शुरू में तो शाबाशी मिल जाये, यही किसी पुरुस्कार से कम न था, उसकी नज़र में. आस-पास वाले तो इस सम्बन्ध में जिक्र करना भी गुनाह समझते थे. कहीं इसका हौसला न बढ़ जाये! पैसन में तब्दील कवितायेँ लिखने का उसका शौक धीरे-२ रंग ला रहा था. अपनी एक आंटी से उसने और अच्छी कवितायेँ लिखने के गुर भी जाने थे. एक पत्रिका द्वारा अच्छी रचनाएँ आमंत्रित की गयी, जिसमे शीर्ष की चंद रचनाओं को इनाम भी देने की बात थी. उसके उत्साह का ठिकाना न था. आंटी की मदद से उसने कुछ बहुत अच्छी रचनाएँ पत्रिका को भेज दीं. उसकी एक रचना के लिए पुरस्कार हेतु उसका भी चयन हो चुका था. उसकी ख़ुशी का ठिकाना न था. पुरस्कार स्थल पर बुलाकर समारोह के बीच खुद को सम्मानित होते देखना निश्चित ही ख़ुशी का ही पल होता है. एक स्मृति चिन्ह, प्रशश्ति-पत्र और नकद पुरस्कार के साथ उसकी वापसी हुयी. परिवार में ख़ुशी का माहौल था. एक स्थानीय समाचार-पत्र को कार्यक्रम की सूचना, समाचार लगाने की दृष्टि से भेजने के लिए उसने पूरी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की. जिसमे नकद पुरस्कार का लिफाफा भी स्केन किया हुआ था और नीचे लिखा था- नकद पुरस्कार वाला लिफाफा !!… पत्र संपादक ने फाइल खोला और दृष्टिपात करते हुए वह एक जगह आकर रुक गया- वह था- नकद पुरस्कार वाला लिफाफा !!… समझाते हुए संपादक ने कहा- ख़ुशी ज़ाहीर है लेकिन कम से कम एक स्तर तो बना कर रखिये. थोड़ी मायूसी तो हुयी लेकिन थोड़े संपादन के बाद समाचार प्रकाशित कर दिया गया. आज भी उसके दिमाग में वह पल तरो-ताज़ा हो जाता है. उसे भी लग रहा था- अतिउत्साह में उसने अन्य फोटोज के साथ लिफाफा भी प्रकाशन के लिए स्केन कर दिया था. कभी-२ खुद ही सोच-सोच कर वह अपने आप पर हंसने लगती है- नकद पुरस्कार वाला लिफाफा !!…

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
November 30, 2012

तुफैल जी, आपका ”नगद पुरस्कार बाला लिफाफा ”अति सुन्दर लघु कथा है .. बहुत आभार सहित…

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 2, 2012

    आदरणीय सुषमा जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

yamunapathak के द्वारा
November 30, 2012

खुबसूरत लघु कथा. इसलिए तो कहती हूँ की हम सहजतावादी बने अछे पल में हर्षातिरेक नहीं बुरे पल में शोकाकुल न हों संतुलित रहे तो सही निर्णय ले पाएंगे. साभार

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    December 2, 2012

    आदरणीय यमुना जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

November 23, 2012

तुफ़ैल साहब नमस्कार ! पहले पुरस्कार का आनंद और उत्साह ही ऐसा होता है की लोगों को क्या लगेगा आदमी भूल जाता है।  बड़ी ही सटीक और मार्मिक कहानी।बधाई स्वीकार करें ! साभार

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 25, 2012

    आदरणीय डाक्टर साहब सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 23, 2012

प्रिय भाई तुफैल साहब , आदाब ! …… लघु-कथा की कसौटी पर बिलकुल खरी ! हार्दिक बधाई !!

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय गुंजन जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. आपने मनोबल भी बढाया. बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

yogi sarswat के द्वारा
November 23, 2012

कभी कभी अति उत्साह में ऐसा हो जाता है ! सुन्दर कहानी तुफैल साब

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय योगी जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आई. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 22, 2012

बहुत बढियां।

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय चतुर्वेदी जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आयीं. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

vinitashukla के द्वारा
November 22, 2012

रोचक शैली में लिखी गयी सुंदर व सार्थक लघुकथा. बधाई.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय विनीता जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आयीं. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

akraktale के द्वारा
November 22, 2012

आदरणीय सिद्धकी जी                       सादर, कई बार यह हमें देखने को मिला है कि किसी सुपर स्टार से हाथ मिलाकर उनके फेंस को यह कहते कि मै यह हाथ कई दिन नहीं धोऊंगा.एक लिफ़ाफ़े का स्कैन उसके मुकाबले तो कुछ उच्च स्तर ही रखता है.पहले पुरस्कार कि खुशी इससे कम भी नहीं होती. सुन्दर लघुकथा. बधाई स्वीकारें.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय अशोक जी सादर अभिवादन, आपकी बात से सहमती. बेशक पहले पुरस्कार की खुशी बहुत होती. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

ashishgonda के द्वारा
November 22, 2012

मित्र! सादर अभिवादन. हे लघु कथाओं के महासागर! आशीष आपका लेख देख मुग्ध है. मैं उस गुमनाम लड़की के खुशी में खुश हूँ. शैली रोचक, लिखा है. समय मिले तो एक मार्मिक प्रेम-कथा भी पढ़ लीजियेगा- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/11/19/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/ धन्यवाद.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय आशीष जी सादर अभिवादन, पोस्ट आपको पसंद आयीं. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

Malik Parveen के द्वारा
November 22, 2012

तुफैल जी नमस्कार , सुंदर और नेक सलाह …. कभी कभी ख़ुशी में इतना ज्यादा लीन हो जाते की ध्यान ही नहीं रहता … बधाई !!

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 23, 2012

    आदरणीय परवीन जी सादर नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

chaand के द्वारा
November 21, 2012

तुफैल जी ,बढ़िया लघु कथा.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 21, 2012

    आदरणीय चाँद जी सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

November 20, 2012

पुरस्कार चीज ही ऐसी है अच्छे भावो के लिये बधाई

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 21, 2012

    आदरणीय हिमांशु जी सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 20, 2012

अछि नसीहत, ध्यान रखियेगा. बधाई. सादर

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    November 21, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-२ शुक्रिया. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com


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