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हम भारतवासी

Posted On: 3 Apr, 2011 Others में

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एक दिन मुझे श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कृति ‘ए वतन तेरे लिए’ की ये रचना पढ़ने का सौभाग्य मिला. कविता की मुझे बहुत अधिक समझ नहीं है, लेकिन फिर भी श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कृति ‘ए वतन तेरे लिए’ की ये रचना मुझे ऐसी प्रतीत हो रही है जैसे इसके सहज भावों को किसी के लिए भी समझना कठिन नहीं है. पूर्ण रूप से राष्ट्रीयता के प्रति प्रतिबद्ध ये रचना अपने आप में इतना कुछ समेटे हुए है कि बरबस ही आप लोगों के समक्ष इस रचना को प्रस्तुत करने के लिए मै बाध्य हो रहा हूँ.

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हम भारतवासी दुनिया को, पवन धाम बनायेंगे,
मन में श्रद्धा और प्रेम का, अद्भुत दृश्य दिखायेंगे.

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ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, दिल में प्यार बसायेंगे,
नफरत का हम तोड़ कुहासा, अमृत रस सरसाएंगे.
हम निराशा दूर भगाकर, फिर विश्वास जगायेंगे,
हम भारतवासी दुनिया को, पावन धाम बनायेंगे.

——————————————————————————

उलझन में उलझे लोगों को तत्वदीप समझायेंगे,
भटक रहे जो जीवन पथ से उनको राह दिखायेंगे.
हम खुशियों के दीप जला, जीवन ज्योति जलाएंगे,
हम भारतवासी दुनिया को, पावन धाम बनायेंगे.

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सत्य अहिंसा त्याग समर्पण की बगिया मह्कायेंगे,
जग के सारे कलुष मिटा धरती को स्वर्ग बनायेंगे.
‘विश्व बंधुत्व’ का मूल मन्त्र, हम दुनिया में सरसाएंगे,
हम भारतवासी दुनिया को, पावन धाम बनायेंगे.

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- रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
की कृति ‘ए वतन तेरे लिए’ से साभार.

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ravindra Nath के द्वारा
February 25, 2014

मान्य निशांक जी की कविता हम भारतवासी हर शब्द के साथ पढ़ने के बाद मुझे यही लगा कि यह उच्चकोटी की कविता है। छात्रों में सद्भाव दिलाने में अध्यापकों के हाथों में एक बूटी है। सद्गुणों के विकास में महत्भूमिका निभाने में      सहायक होगा। कविता का लक्ष्य विश्व बंधुत्व,प्रेम,त्याग,अहिंसा,समर्पण,देश भक्ति आदि भावनाएँ आगे की पीढ़ी अपनाने में प्रेरणादायक जरूर बनेगा।

abodhbaalak के द्वारा
April 4, 2011

तौफिक जी आपके अक्सर पोस्ट ऐसे होते हैं जिन्हें पढ़ कर अपनी अज्ञानता का ………… आप बंधाई के पात्र hai जो hame in mahaanubhaaon se milate rahte हैं http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    आपके छोटे भाई तौफिक का आपको बहुत आभार.

vinita shukla के द्वारा
April 4, 2011

सुन्दर कविता से रूबरू करने के लिए धन्यवाद.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    विनीता जी अभिवादन, आपका बहुत आभार.

nishamittal के द्वारा
April 4, 2011

सिद्दीकी जी,राष्ट्र प्रेम की भावना से ओतप्रोत रचना से परिचित करने के लिए धन्यवाद.शुभकामनाएं नव वर्ष की.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    निशा जी अभिवादन, आप लोगों का सहयोग मिलता रहेगा तो आगे भी इस प्रकार की कोशिश करने का प्रोत्साहन मिलेगा. प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभार.

K M Mishra के द्वारा
April 4, 2011

सत्य अहिंसा त्याग समर्पण की बगिया मह्कायेंगे, जग के सारे कलुष मिटा धरती को स्वर्ग बनायेंगे. ‘विश्व बंधुत्व’ का मूल मन्त्र, हम दुनिया में सरसाएंगे, हम भारतवासी दुनिया को, पावन धाम बनायेंगे. निशंक जी की अति सुन्दर कविता के लिए आभारी हूँ. सिद्दकी जी.  जय भारत.

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    मिश्रा जी अभिवादन, हम सब को निशंक जी का हार्दिक आभार व्यक्त करना है. आपकी भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभार.

aftab azmat के द्वारा
April 4, 2011

तुफैल भाई, आपने बहुत अच्छा काम किया है, निशंक जी की कार्तीय लाजवाब हैं…

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    आफताब भाई आदाब, बिलकुल सही कहा आपने, निशंक जी की कृति वास्तव में लाज़वाब है. प्रतिक्रिया के लिए बहुत शुक्रिया.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
April 3, 2011

यह कविता साझा करने के लिए बहुत धन्यवाद आपको तुफ़ैल भाई|

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    वाहिद भाई आदाब, कोशिश यही होनी चाहिए की इस प्रकार की रचनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने में हम सभी योगदान कर सकें. प्रतिक्रिया के लिए बहुत शुक्रिया.

Ramesh Bajpai के द्वारा
April 3, 2011

प्रिय श्री सिद्दीकी भाई उदगारो का यह बहुमूल्य उपहार अति प्रसंसनीय है | उलझन में उलझे लोगों को तत्वदीप समझायेंगे, भटक रहे जो जीवन पथ से उनको राह दिखायेंगे बहुत बहुत बधाई

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    आदरणीय बाजपई जी सादर अभिवादन, इस बहुमूल्य उपहार की ढेरों बधाइयाँ हम सभी की और से निशंक जी को. प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभार.

आर.एन. शाही के द्वारा
April 3, 2011

सिद्दीक़ी भाई, निशंक जी की रचना में छिपी भावनाएं अत्यंत उन्नत श्रेणी की हैं, पाठ्यपुस्तकों में समाहित करने योग्य । बधाई ।

    Tufail A. Siddequi के द्वारा
    April 5, 2011

    आदरणीय शाही जी अभिवादन, आप बिलकुल सही कह रहे हैं, ऐसी रचनाओं को पाठ्य पुस्तकों में समाहित करके नवयुवकों में देश प्रेम के जज्बे को सृजित किया जा सकता है. निश्चित ही निशंक जी की ये रचना बहुत ही उन्नत श्रेणी की है, जिसे प्रस्तुत करके मैंने भी कुछ पुण्य अवश्य कमाया होगा. प्रतिक्रिया के लिए बहुत शुक्रिया.


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